Thursday, 31 December 2015

और ये रहीं साल 2015 की सबसे चर्चित, सबसे विवादास्पद और सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें

भुखमरी से ग्रस्त और कर्ज़े में डूबे किसानों का आत्महत्या करना जारी है, महंगाई दर बढ़ रही है, दाल 200 रुपए किलो तक पहुंच चुकी है, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं, भ्रष्टाचार पर कोई रोक नहीं है, रुपए की कीमत गिर रही है....लेकिन यह सभी और इनके जैसी जनता को सीधे-सीधे प्रभावित करने वाली खबरें आजकल मीडिया की हैडलाइन नहीं बनती इन्हें तो मुश्किल से  एक या दो दिन ही प्राइम टाइम या अखबार का मुखपृष्ठ नसीब होता है। इसलिए इन खबरों की बात करना शायद बेमानी हो। इसलिए यहां हम आपके लिए लाए हैं ऐसी कुछ खबरें और ज्यादातर विवाद जिन पर न्यूज़ चैनल्स में सबसे ज्यादा पैनल डिस्कशन हुए, जिनसे जुड़ी बातों और तस्वीरों को सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया और जिनके बारे में डिजिटल बन रहे भारत में सबसे ज्यादा बातें, बहस और चर्चाएं हुईं।





  • चीफ गेस्ट बराक ओबामा
मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद कभी भी जनता को चकित करना नहीं छोड़ा। पिछली साल जहां उन्होेंने शपथ ग्रहण समारोह पर सार्क देशों के शीर्ष नेताओं को बुलाकर पूरी दुनिया की खबरों में स्थान बना लिया था वहीं इस बार साल की शुरूआत में गणतंत्र दिवस की परेड में महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को बुलाकर मोदी ने एक बार फिर साबित किया कि वो लोगों को हैरान करने में माहिर हैं। जहां हमारे देश ने अब तक जॉर्डन, नेपाल, मॉरीशस, बांग्लादेश जैसे छोटे और विकासशील देशों के प्रतिनिधियों को ही मुख्य अतिथि की कुर्सी सजाते देखा था, वहीं इस कुर्सी पर बराक ओबामा को लाकर मोदी ने सबको चौंका दिया।





  • आम आदमी बना सीएम

  मोदी सरकार क्या बड़े-बड़े चुनाव पंडित तक यह अंदाज़ा नहीं लगा पाए थे कि पिछली बार इस्तीफा देकर  जनता की नाराज़गी का सामना करने के बावजूद, मफलर मैन अरविंद केजरीवाल दिल्ली में इतनी धमाकेदार वापसी करेंगे। आम आदमी पार्टी की झाड़ू कुछ यूं चली कि कांग्रेस तो पूरी तरह सफा हो गई और बीजेपी बचा पाई केवल तीन सीटें। 10 फरवरी 2015 का दिन शायद केजरीवाल की जिंदगी का सबसे यादगार दिन होगा जब दिल्ली विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर विजय हासिल करके आम आदमी पार्टी राजधानी की सत्ता पर काबिज हो गई। एक ऐसी विजय, जो सालों विरोधी पार्टियो को एक दु:स्वप्न बनकर डराती रहेगी। एक और इंसान का ज़िक्र ज़रूरी है... किरण बेदी। मैडम बीजेपी की सीएम उम्मीदवार बनकर मैदान में उतरी थी और इन्हीं के सहारे बीजेपी को जीत की उम्मीद थी, लेकिन बैलट बॉक्स खुले तो सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं।




  •  पटेलों को भी चाहिए आरक्षण

इस वर्ष एक चौंकाने वाला वाक्या तब हुआ जब अगस्त माह में गुजरात के बेहद सभ्रांत पटेल समुदाय ने हार्दिक पटेल के नेतृत्व में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। अब तक केवल बैकवर्ड क्लास और अनूसूचित जाति और जनजाति द्वारा आरक्षण मांगे जाने की प्रथा को एक तरफ करके पहली बार समृद्ध गुजराती वर्ग अपने लिए आरक्षण की मांग की। क्यों भाई, आरक्षण की रेवड़ी जब बंट ही रही है तो क्यों ना पटेल समुदाय भी इसे लूट ले। इस मांग ने अन्य अगड़ी जातियों और समुदायों के लिए भी निकट भविष्य में आरक्षण मांगे जाने के लिए दरवाज़े खोल दिए हैं। कोई बड़ी बात नहीं है कि अगले कुछ सालों में आपको पंजाबी, बनिया, सिंधी, पंडित आदि सभी आरक्षण मांगते नज़र आएं।





  • याकूब मेमन को फांसी, जनता दुखी

30 जुलाई को 1993 मुम्बई बम धमाकों को फाइनेंस करने का दोषी पाए जाने वाले  53 वर्षीय चार्टेड एकाउंटेन्ट याकूब मेमन को जब फांसी पर लटकाया गया तो पूरे देश में जैसे सैलाब आ गया। कुछ अभिनेता यह तक कहते पाए गए कि वो निर्दोष था, अच्छा आदमी था और उसे मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए थी। फांसी दिए जाने के बाद जब मेमन के शरीर को दफनाने के लिए ले जाया गया तो उसके शव के साथ मातम मनाने के लिए पूरे देश का समुदाय विशेष उमड़ पड़ा। सड़कों पर ऐसा जनसैलाब था मानों किसी बहुत बड़े महात्मा, नेता या राष्ट्रभक्त को अंतिम शैय्या पर ले जाया जा रहा हो।




  • मोदी ने मार्क ज़ुकेरबर्ग को साइड किया

यूं तो नरेन्द्र मोदी का कैमरे से प्यार किसी से छिपा नहीं लेकिन मोदी ने फेसबुक सीईओ मार्क ज़ुकेरबर्ग की बांह पकड़कर कैमरे के सामने से हटाकर जो कारनामा किया उसका कोई उदाहरण शायद ढूंढे से भी ना मिले। पता नहीं किस निगोड़े ने मोदी का ऐसा करते हुए वीडियो बना लिया। कुछ ही समय में यह वीडियो वाइरल हो गया और केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जमकर देखा गया।





  • केजरीवाल का ईवन-ऑड बम

लगातार केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ पोल खोल अभियान चलाने और झगड़ालू बीवी की तरह बीजेपी सरकार के हर काम में नुक्स निकालकर और शिकवा-शिकायतें करके पहले से ही खबरों में बने हुए केजरीवाल ने साल के अंत में एक जोरदार धमाका किया, ईवन-ऑड बम का धमाका। यह बम इतना ज़बरदस्त था कि पूरी राजधानी दिल्ली हिल गई। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि नई कार खरीदें या एक और नम्बर प्लेट बनवाएं। पूरे दिसबंर माह में इस ईवन-ऑड फॉर्मूले ने ट्विटर पर सबसे ज्यादा ट्रेंड किया, वॉट्सएप पर सबसे ज्यादा जोक्स इसी पर बनाए गए। लोग धीरे-धीरे स्थिति से समझोते की कोशिश कर रहे हैं और केजरीवाल आश्वस्त हैं कि यह फॉर्मूला सफल होने के काफी चांसेज हैँ। ऑल द बेस्ट दिल्ली वालों।





  • सलमान ने किसी को नहीं मारा

 2002 में हुए हिट एंड रन केस का फैसला आखिरकार 13 साल बाद आया और 10 दिसंबर 2015 को अभिनेता सलमान खान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। खैर वो कैसे छूटे यह अलग बहस या जांच का विषय हो सकता है लेकिन हमारे देश में हम कोर्ट के ऊपर सवाल उठाने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। हांलाकि इस निर्णय से चकित भारतवासी यह भी कहते पाए जा रहे हैं कि जब यहीं फैसला होना था तो कोर्ट ने 13 साल इंतज़ार क्यों किया। यह बात भी अलग है कि इस केस ने एक सलमान के उस समय के बॉडीगार्ड और मुंबई पुलिस के हैंडसम और ईमानदार कॉन्स्टेबल रविन्द्र पाटिल की जान ले ली। हाईकोर्ट ने स्वर्गवासी हो चुके इस आई विटनेस की टेस्टिमनी को मानने से इन्कार कर दिया और सलमान आरोपमुक्त हो गए। वॉट्सएप पर इस दौरान एक मैसेज खूब चला जिसका मजमूं कुछ यूं हैं-
"गाड़ी हिरण चला रहा था, उसने पेट्रोल ज्यादा पी लिया था जिससे वो नशे में थी, सलमान फुटपाथ पर सोये थे, ड्राइवर फिल्म की शूटिंग पर गया था, गरीब लोग मैकडॉनाल्ड से बर्गर खाकर आए थे, बर्गर ज्यादा हो गया था तो पचाने के लिए सलमान की लैंड क्रूज़र के टायर के नीचे लेट गए : न्यायपालिका अमर रहे। "





  • महागठबंधन

मोदी सरकार की ऐसी आंधी चली कि लालू और नीतिश के बीच की विरोध की दीवारें बह गई। जो नेता अब तक एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते आए थे इस बार एक साथ महागठबंध में बंधे जिसमें कांग्रेस भी इनके साथ हो ली। विरोधी जब एक साथ चुनाव लड़े, बिहार को बेस और फेस दोनों मिला तो आखिरकार बेसलेस और फेसलेस बीजेपी का पत्ता वहां साफ हो गया। इस घटना का एक साइड इफेक्ट यह रहा कि आजकल अमित शाह मोदी के साथ नज़र नहीं आते।





  • सहिष्णुता वर्सेज असहिष्णुता और पुरस्कार वापसी

बिहार में चुनाव क्या घोषित हुए, अब तक कम आवाज़ों में चल रही सहिष्णुता और असहिष्णुता की बहस समाचार पत्रों और चैनलों के डिस्कशन पैनल्स से होती हुई पूरे देश के लोगों के ड्राइंगरूमों तक पहुंच गई। देश के गणमान्य  लेखकों और कवियों ने पुरस्कार वापसी अभियान छेड़ दिया। नतीजा यह कि अखबारों में पुरस्कार मिलने की खबरें कम और लौटाए जाने की खबरें ज़्यादा दिखने लगीं। इसी बहाने बहुत से लेखकों और कवियों की भी चांदी हो गई। जिन्हें अवॉर्ड मिल जाने के बावजूद पड़ौसी तक नहीं जानते थे उन्हें अवॉर्ड लौटाने पर ऐसी प्रसिद्धि मिली कि पूरा देश जान गया (वैसे इसके लिए यूपी में एक कहावत भी है- बहती गंगा में हाथ धोना)। खैर बिहार चुनाव का नतीजा आ गया और साथ ही यह अभियान भी खत्म हो गया। हांलाकि सहिष्णु-असहिष्णु की बहस अभी भी जारी है। लेेकिन आमिर और शाहरुख की गत बनने के बाद अब कम से कम सेलेब्रिटीज़ के लिए तो यह वो मुद्दा बन गया है जिसपर वो हाथ  नहीं लगाता बेहतर समझते हैं।





  • मैगी का जाना और मैगी का आना

पूरे देश की बैचलर्स कौम और बच्चों समेत महिलाओं को भी उस समय गहरा धक्का लगा जब 6 जून 2015 को भारत सरकार ने पूरे देश में दो मिनट में बनने वाले मैगी नूडल्स की बिक्री पर रोक लगा दी। इसकी शुरूआत मई 2015 में उत्तर प्रदेश के बारांबकी में मैगी के नमूनों काफी मात्रा में खतरनाक मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाए जाने से हुई थी। इसके बाद दिल्ली,फिर गुजरात, असम, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और फिर आखिरकार फिर पूरे देश में मैगी की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया। जांच में पता चला कि मैगी मैदा और स्वादिष्ट मसालों के साथ धात्विक सीसे यानि मैटेलिक लेड की भी फ्री सप्लाई इसे खाने वालों के शरीर में पहुंचा रहा था। कई लोगों ने तो इसे बाबा रामदेव द्वारा अपने आटा नूडल्स को बाज़ार में जमाने के लिए मैगी के खिलाफ किया गया षणयंत्र करार दे दिया। भारतीय मानने को तैयार ही नहीं थे कि जिस मैगी को वो 2 मिनट में बनाते थे वो तो पिछले बीस सालों से उन्हें ही बना रहा था। खैर मैगी ने इस बैन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और 13 अगस्त को मुम्बई हाई कोर्ट द्वारा मैगी पर से बैन हटा दिया गया। मैगी की वापसी सबसे पहले स्नैपडील जैसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों के ज़रिए हुई। और अब तो मैगी फिर से बाज़ार को गुलज़ार कर चुकी है।






  • आमिर और शाहरुख की इन्टॉलरेंस

हम भारतवासी रोटी पर इटैलियन पिज़्जा को अहमियत दे सकते हैं, महिला संगीत की जगह पश्चिमी सभ्यता के डीजे डांस को बेहतर समझ सकते हैं, मंदिर में महिला के पहुंच जाने पर शुद्धिकरण कर सकते हैं, दरगाहों में स्कर्ट पहन के जाने पर रोक लगा सकते हैं, मुसलमानों को अपने मोहल्ले में घर नहीं देंगे और हिंदुओं को अपनी बेटियां नहीं.., लेकिन इन सबके बावजूद हम एक टॉलरेंट देश हैं और कोई हमारी टॉलरेंट कंट्री पर इन्टॉलरेंट होने का इल्ज़ाम लगाए तो हमारी देशभक्ति जाग जाती है। फिर चाहे वो लाखों दिलों की धड़कन बने खान सितारे ही क्यों ना हों।
शाहरुख खान ने दिलवाले रिलीज़ पर माफी भी मांग ली लेकिन फिल्म को बैठना था सो बैठ गई। साल में एक फिल्म करने वाले और 'अतुल्य भारत' के ब्रांड एंबैसडर आमिर खान ने एक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक मंच पर अपनी पत्नी द्वारा देश छोड़ने की सलाह देने की बात क्या साझा की, कि पूरा देश उनके खिलाफ लामबंद हो गया। महाराष्ट्र की एक राजनीतिक पार्टी ने तो आमिर खान को थप्पड़ मारने पर एक लाख का ईनाम देने तक की घोषणा कर डाली। नतीजा यह कि आमिर विज्ञापन और फिल्मों में कम बल्कि हवाई जहाज में ज्यादा नज़र आने लगे (आउटडोर शूटिग्ंस में भाई)। 25 दिसंबर को होने वाली 'दंगल' की रिलीज़ टल गई। और तो और हम पक्के भारतीयों ने स्नैप डील, गोदरेज जैसी उन ब्रांड्स को भी चिंता करने पर मजबूर कर दिया जिन्होंने आमिर को  ब्रांड ऐबैंसडर बनाया था। मैसेज साफ था-खान भाई, फिल्में बनाओ, पैसे बनाओ.. पर गलती से भी अपनी भारत विरोधी राय को सार्वजनिक मत बनाओ। हम भारतीयों की भावनाऐं आहत हो जाती है साहब। इनसे मत खेलों, वरना तुम्हारी फिल्में और स्टारडम हमारी नफरत में फना हो जाएंगे ।





  • इंद्राणी मुखर्जी....

भारतीय खबरों के इतिहास में इंद्राणी मुखर्जी ने जो मुकाम बनाया है वो आजतक कोई महिला नहीं बना पाई। आईएनएक्स मीडिया की पूर्व सीईओ, अत्याधुनिक नारी, शानदार लाइफस्टायल, दागदार पास्त, बहुविवाह, नाजायज़ बच्चे, मिडिल क्लास परिवार से हाई सोसाइटी तक का सफर, मर्डर, ड्रग्स, पैसा, धोखा, प्रॉपर्टी, सेंसेशन... इंद्राणी मुखर्जी की कहानी में वो सारे मसाले थे जिनसे भारतीय मीडिया और जनता को बेहद प्यार है। 25 अगस्त 2015 को मुम्बई पुलिस द्वारा इंद्राणी मुखर्जी को गिरफ्तार किए जाने से लेकर मुम्बई पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया को पदोन्नति देकर केस से दूर किए जाने तक लगभग तीन हफ्ते के वक्फे तक, भारतीय प्रेस मीडिया, सोशल मीडिया और यहां तक कि चाय की दुकानों, ढाबों और ड्रांइगरूमों में होने वाली चर्चाओं में भी केवल और केवल इंद्राणी मुखर्जी उर्फ परी बोरा ही छाई रहीं। अपनी शर्तों और इच्छाओं पर ज़िंदगी जीने वाली इंद्राणी ने भारतीय मीडिया और जनता को वो मसाला दिया जिसका स्वाद आजतक उन्होंने केवल शोभा डे जैसी लेखिकाओं द्वारा रचित कल्पनातीत पात्रों की कहानियों में चखा था। पता नहीं इस केस का फैसला क्या होगा लेकिन यह तय है कि इंद्राणी बिला शक 2015 का सबसे बहुचर्चित नाम बन चुकी है।





  • पड़ौसी हो तो मोदी और नवाज़ जैसे

और जैसा कि हम ऊपर भी कह चुके हैं कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोगों को हैरान करने वाली स्किल्स का कोई जोड़ नहीं है, तो उन्होंने एक बार फिर ऐसा जबरदस्त सरप्राइज़ दिया साल के अंतिम हफ्ते में बिना किसी पूर्व सूचना या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के घर पहुंचकर। 25 दिसंबर को जब भारतीय प्रधानमंत्री का विमान पाकिस्तान एयरपोर्ट पर उतरा तो देशी ही नहीं विदेशी मीडियाकर्मियों तक के चेहरों पर आश्चर्य ही आश्चर्य नज़र आने लगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तो यह तक कह डाला कि पड़ौसी तो ऐसे ही होने चाहिए (मतलब जैसे हम अपने पड़ौसियों से कभी टमाटर, कभी आलू मांगने या कभी यूं ही गाहे-बगाहे गॉसिप करने पहुंच जाते हैं, ठीक वैसा ही कुछ माहौल मोदी ने भी बनाने की कोशिश की)। शरीफ की नातिन की शादी में अपने पूरे अफसरों की फौज समेत बिना वीज़ा पहुंचे मोदी ने जो कमाल करके दिखाया उसका कोई जवाब नहीं। मोदी ने मेहमान'नवाज़ी' का लुत्फ उठाया और दोनों मुल्क की जनताओं ने इस खबर का, नुकसान हुआ तो केवल हिन्दी फिल्मों की अभिनेत्री साधना का जिनका इंतकाल 26 दिसंबर को हो गया था लेकिन मोदी की पाकिस्तान जाने की खबर के चलते उनकी मौत की खबर को सही सम्मान नहीं मिल सका।