Monday, 28 September 2015

इस कहानी को पढ़ते समय दिमाग का इस्तमाल ना करें.. यह किस्सा तर्कों और अर्जित ज्ञान की सीमाओं से परे हैं :-)



सम्भापुर में एक 10 साल का लड़का रहता था- चंद्रभान। उसे दुनिया से कोई मतलब नहीं था। उसका कोई भी दोस्त नहीं था, उसे प्यार था तो केवल किताबों से। उसकी प्रिय किताबें थी गणित, रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री), भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की किताबें। दिन रात चंद्रभान केवल किताबों में डूबा रहता था। खाता था तो हाथ में किताबें, सोता था तो भी किताबों के साथ.. अपनी बातें भी वो किताबों के साथ ही करता था।

एक दिन दूसरे ग्रह दूरामी से आए एक एलियन मॉन्स्टर ने उसका अपहरण कर लिया जो कि उसकी स्टडी टेबल के नीचे छिपा हुआ था। दूरामी का एलियन 'भूलखा' धरती ग्रह पर रहने वाले लोगों के बारे में पता लगाने के लिए आया था। भूलखा काफी दिनों से चंद्रभान की गतिविधियां देख रहा था और एक दिन वो उसका अपरहण करके अपने साथ दूरामी ले गया।

जब चंद्रभान दो तीन घंटों तक किताबों के पास नहीं आया तो किताबें परेशान हो गईं। गणित की किताब से निकला अर्थमैटिको, फिजिक्स का फिजिक्सा, बायोलॉजी से बायोलाल जी और केमिस्ट्री से केमिकेलिया... यह चारों मिलकर मंत्रणा करने लगे कि आखिर चंद्रभान गया तो गया कहां।

बायोलाल जी ने टेबल के नीचे के माइक्रोऑर्गेनेज़ि्म्स से पूछा कि क्या उन्हें चंद्रभान के बारे में पता है, तो वहीं केमिकेलिया टेबल के ऊपर जग में रखे पानी के हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अणुओं से चंद्रभान के बारे में मालूमात हासिल करने लगे।
आखिरकार कमरे के वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन एटम ने केमिकेलिया को बताया कि उसने एक एलियन को चंद्रभान को ले जाते देखा है। बाहर निकले तो उपस्थित अन्य अणुओं, बैक्टीरिया और वायरस ने भी बायोलाल जी को सारी कहानी सुना दी।

अब चारों को अपने परम मित्र चंद्रभान की जान बचानी थी। चारों ने दूरामी प्लेनेट जाकर चंद्रभान को छुड़ाने की ठान ली। सबसे पहले बायोलाल जी ने वायुमंडल में उपस्थित बेक्टीरियल कोशिकाओं (cells) का प्रयोग करके चारों को अमीबॉइड शेप्स में बदल दिया, जिससे वो चारों किसी भी शेप में आ सकते थे।

अब फिजिक्सा ने ग्रेविटेशनल फोर्स को रिवर्स करके उसे लेविटेशनल (levitational) फोर्स में तब्दील कर दिया। गुरुत्वाकर्षण से मुक्त होते ही चारों उड़ते हुए, हवा में तैरते हुए प्लेनेट अर्थ से बाहर निकल गए। सब स्पेस में पहुंच चुके थे।

अागे का काम केमिकेलिया ने संभाला, उसने स्पेस में सफर कर सकने वाली लाइट के फोटॉन पार्टिकल्स से एक स्पेस रॉकेट बनाया, चारो उसमें बैठे और अब फिजिक्सा ने उसे रॉकेट में लाइट ईयर्स की स्पीड दे दी। अब अर्थमैटिको ने लाइटईयर स्पीड को 100 से गुणा करके उसे सौगुना तेज़ कर दिया। इस तरह चारों फोटॉन रॉकेट में बैठ कर 100 लाइट ईयर्स प्रति माइक्रोसैंकेंड की स्पीड से उड़े और 5 मिनट में 10 गैलेक्सीज़ पार करके दूरामी ग्रह पहुंच गए।
 
दूरामी ग्रह इनर्ट गैस हीलियम का बना था। वहां चारों तरफ अजीब सी बायोलॉजिकल सरंचना वाले करोड़ों एलियन मॉन्सटर्स थे। किसी को भी उनको मारने का तरीका नहीं सूझ रहा था। तब अर्थेमैटिको ने दिमाग चलाया और उसने सारे मॉन्सटर्स को ज़ीरो से मल्टिप्लाई कर दिया। सारे मॉन्सटर्स गायब हो गए। अब वहां केवल उनका चीफ भूलखा बचा था। जो कि हीलियम गैस के महल के अंदर था जो कि बहुत मज़बूत था।

महल की दीवारों को तोड़ने के लिए कैमिकेलिया ने हीलियम अणुओं के बीच न्यूक्लियर फिज़न की क्रिया कराई जिससे जबरदस्त एनर्जी निकली और हीलियम का महल ब्लास्ट हो गया। अब चारों भूलखा तक पहुंच चुके थे।

भूलखा ने चंद्रभान को अपनी ज़ेनॉन की लेबोरेट्री में कैद कर रखा था। फिज़िक्सा, केमिकेलिया और बायोलाल जी उससे लड़ते रहे, पर भूलखा पर कोई वार काम नहीं कर रहा था। बायोलॉजिया ने जब उसकी शारीरिक संरचना का अध्ययन किया तो पता चला कि भूलखा मर नहीं सकता और वो अपने शरीर के अणुओं को बिखरा (disintegrate) सकता था। इसी तरह से वो बार-बार उनका हर वार झेल रहा था।

सबने मिलकर एक योजना बनाई, अब की बार कैमिकेलिया ने सल्फ्यूरिक एसिड का वार किया, जैसे ही उससे बचने के लिए भूलखा ने अपने शरीर के अणुओं को डिसइन्टीग्रेट किया, बायोलाल जी ने फटाफट उसके थोड़े से अणु समेट कर अर्थमैटिको को पकड़ा दिए.. और अर्थमैटिको उन अणुओं से भूलखा के शरीर के बाकी अणुओं को डिवाइड करता चला गया। लगातार -लगातार डिवीजन (भाग) होने के कारण भूलखा संभल भी नहीं पाया और छोटा होता चला गया। इतनी देर में फिजिक्सा ने फोर्थ डाइमेंशन तैयार कर ली।
अर्थमैटिको ने लगातार डिवीज़न के बाद बिल्कुल छोटे हो चुके भूलखा को उस फोर्थ डाइमेंशन में फेंक दिया। फिजिक्सा ने तुंरत फोर्थ डाइमेंशन को बंद कर दिया और भूलखा वहीं कैद होकर रह गया।

चारों ने मिलकर चंद्रभान को मुक्त कराया और अपने दोस्त को लेकर सब सही सलामत धरती पर वापस लौट आए।

आज भी भूलखा कई गैलेक्सियों परे स्पेस में बनी फोर्थ डाइमेंशन में कैद है। वो इंतज़ार कर रहा है कि कब फोर्थ डाइमेंशन के बारे में लोग जाने, और कोई आकर उसे निकलने का रास्ता बताएं.....।


कारों और बाइक की दोस्ती की अनोखी कहानी पढ़िए.

जी हां डस्टबिन को भी बुरा लग सकता है, आखिर तो वो अपना काम कर रहा है... पढ़िए डस्टबिनाबाद और रीसाइक्लाबाद की कहानी

फलों और सब्ज़ियों के बीच दोस्ती की शुरूआत की कहानी


Saturday, 12 September 2015

रंग लाई फूयो, ऑल्टिया और मर्सिडीज़िया की दोस्ती



गाज़ियाबाद की एक आधुनिक सोसाइटी की बेसमेन्ट पार्किंग में एक ऑल्टो कार और एक हीरो हौन्डा बाइक रहा करते थे। दोनों में गहरी दोस्ती थी। कार का नाम था ऑल्टिया और बाइक थी फूयो। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि एक दिन भी अगर दोनों एक दूसरे से बात ना करें तो परेशान हो जाते थे। कभी ऑल्टिया गर्मी से परेशान फूयो को अपने ठंडे एसी की हवा दिया करती थी तो कभी फूयो, ऑल्टिया के थके हुए टायरों की अपने किक स्टार्टर से मालिश कर दिया करता था। सारे त्यौहार, छुट्टियां दोनों साथ मनाते थे। दोनों एक दूसरे के साथ खूब मस्ती किया करते थे।

फिर एक दिन अचानक ऑल्टिया गायब हो गई। फूयो ने उसका बहुत इंतज़ार किया। अन्य साथी कारों, स्कूटरों और बाइकों से भी पूछा पर किसी को मालूम नहीं था। हफ्ता गुज़र गया। फूयो बहुत उदास रहने लगा। उसकी दोस्त जाने कहां चली गई थी। .. और फिर एक दिन ऑल्टिया की जगह एक चमचमाती नई ग्रे रंग की बड़ी कार खड़ी होने लगी। 

फूयो को हैरानी हुई। उसने उस नई कार से बात करने की कोशिश की, उसका हाल-चाल पूछा, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। वो अपनी अकड़ में रहने वाली गुरूर से भरी हुई कार थी। जिसे फूयो से मामूली बाइक से दोस्ती करना पसंद नहीं था। जब फूयो ने  उससे एक बार और पूछा तो उस ग्रे कार ने अपनी हैडलाइट झटकते हुए गुस्से से कहा कि देखो- आय एम मर्सिडीज़ीया.., मैं अपने फ्रेंड्स बहुत सोच-समझ कर बनाती हूं, हर किसी से दोस्ती नहीं कर सकती। इसलिए आगे से मुझसे बात करने की कोशिश मत करना।

फूयो बेचारा दुखी हो गया। अब वो अकेला था। बात करने के लिए, खेलने के लिए कोई नहीं था। मर्सिडीज़िया तो उसकी तरफ देखती तक नहीं थी, खेलना तो दूर की बात रही। एक दिन वो ऐसे ही दुखी होकर ऑल्टिया को याद कर रहा था.. " ओ ऑल्टिया, मेरी दोस्त, तुम कहां चली गईं, तुम होती तो हम कितनी मस्ती करते।.. " वो बड़बड़ा ही रहा था कि मर्सिडीज़िया की हैरानी भरी आवाज़ आई- " तुम ऑल्टिया को कैसे जानते हो? " 

फूयो हैरान, उसने मर्सिडीज़िया को बोला कि तुमसे पहले यहां ऑल्टिया ही रहा करती थी। उससे मेरी गहरी दोस्ती थी, और फिर एक दिन वो गायब हो गई और तुम उसकी जगह आ गईं। मर्सिडीज़िया की आंखों में आंसू आ गए। वो बोली कि जानते हो मैं ऑल्टिया की बड़ी बहन हूं। वो एक कार कार्निवल में मुझसे बिछड़ गई थी। तब से उसे ढूंढ रही हूं। उसकी तलाश में दिल्ली, बम्बई, हैदराबाद.. और जाने कहां कहां गई पर वो मुझे नहीं मिली। आज पता चला कि वो यहां थी। क्या तुम उसे ढूंढने में मेरी मदद करोगे?

फूयो भी हैरान था। उसने प्रॉमिस किया कि वो ज़रूर मदद करेगा। उस दिन से मर्सिडीज़िया और फूयो दोस्त बन गए, दोनों साथ रहने लगे, घूमने लगे और एक साथ ऑल्टिया को ढूंढने की कोशिश करने लगे। 

एक दिन दोनों साथ पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे कि अचानक फूयो को दूसरी तरफ बीमार, परेशान ऑल्टिया दिख गई। उसमें ड्राइविंग सीट पर एक गुंडा सवार था। फूयो चुपके से उसके पास पहुंचा और ऑल्टिया से पूछा कि वो वहां कैसे आई। 

ऑल्टिया, फूयो को देखकर खुश हो गई। उसने बताया कि यह आदमी उसे चुरा कर लाया है और अब वो उसे स्क्रैप यार्ड भेजने की तैयारी कर रहा है, जहां उसे मार दिया जाएगा। फूयो तुरंत मर्सिडीज़िया के पास पहुंचा और उसे सारी बात बताई। दोनों ने मिलकर ऑल्टिया को छुड़ाने की तरकीब सोच ली थी। 

जब ऑल्टिया को लेकर वो चोर पेट्रोल पंप से निकला, फूयो कार के सामने आकर लेट गया। उस चोर ने हड़बड़ी में ब्रेक लगाए और वो फूयो को रास्ते से हटाने के लिए कार से बाहर निकला। जैसे ही वो बाहर निकला, तैयार खड़ी मर्सिडीज़िया ने उसे टक्कर मार दी। चोर बेहोश होकर ज़मीन पर गिर गया। 

फौरन फूयो उठा। वो, ऑल्टिया और मर्सिडीज़िया वहां से दौड़ पड़े। तीनों बहुत तेज़ भागे और एक नई जगह जाकर रुके। ऑल्टिया भी आज़ाद होकर और  बिछड़ी हुई बहन से मिलकर बहुत खुश थी। उस दिन से तीनों वहीं साथ-साथ रहेने लगे। वो हमेशा दोस्त रहे। उनकी दोस्ती के किस्से आज भी कार वर्ल्ड में किवदंती की तरह सुनाए और गुनगुनाए जाते हैं।




अब पढ़िए डस्टबिनाबाद और रीसाइक्लाबाद की अनोखी कहानी

पढ़ाकू हैं? तो पढ़ डालिए उस पढ़ाकू लड़के की कहानी जिसकी जान उसकी दोस्त किताबों ने बचाई

एक किस्सा उस दौर का जब फलों और सब्ज़ियों में दोस्ती नहीं थी


Tuesday, 8 September 2015

यह तब की बात है जब फलों और सब्ज़ियों के बीच दोस्ती नहीं थी...

एक समय था जब फल और सब्जियां अलग अलग रहते थे। दोनों में दोस्ती कायम करने में चेरी और शिमला मिर्च का बहुत बड़ा योगदान है। कैसे... जानने के लिए सुनते हैं यह कहानी..

 बहुत समय पहले धरती पर टमाटर के रस की नदी बहा करती थी। नदी के इस तरफ था फ्रूट किंगडम यानि फलों का साम्राज्य और दूसरी तरफ था वेजीटेबल किंगडम यानि सब्जि़यों का साम्राज्य।


फ्रूट किंगडम के राजा थे महामहिम आम और महारानी थी चेरी.. दोनों की जोड़ी एक और शून्य की जोड़ी थी, अलग किस्म की, अजीब जोड़ी लेकिन बेजोड़। फ्रूट किंगडम का शानदार क्यूकम्बर पैलेस, खीरे से बना था। उसमें केले के खम्बे थे और लाल बेर जड़ित खीरे की दीवारें।
महाराजा आम जब तरबूज़ की शानदार अंगूर जड़ी, लाल बग्घी में बैठकर प्रजा के बीच आते थे तो सेब, खुबानी, चीकू, केले और बाकी सारी फलों की प्रजा उनका शानदार स्वागत करती थीं।


नदी के दूसरी तरफ वेजीटेबल किंगडम के महाराजाधिराज थे बैंगन राजा और उनकी महारानी थीं, शिमला मिर्च। इनका महल भिंडी से निर्मित था जिसमें पत्ता गोभी के बड़े-बड़े पर्दे और फूलगोभी के झूमर लटका करते थे। महाराजा की शाही सवारी कद्दू में मटर की नक्काशी करके बनाई गई थी। महल के दोनों ओर गाजर सिपाही तैनात रहते थे।


दोनों अमीर राज्य थे, खुशहाल, खूबसूरत, सुखी और अपने में मगन। बस नदी की सीमा लांघकर कभी किसी ने दूसरे राज्य में जाने की कोशिश नहीं की।

पर नारी मन को क्या कहा जाए.. एक बार महारानी चेरी जब टमाटर नदी किनारे शहतूत के बागों में घुम रहीं थी अचानक उनकी नज़र नदी के पार सेम की बेलों पर पड़ गईं.. रानी का मन वेजीटेबल किंगडम की सैर को मचल गया। तुरंत खीरा महल पहुंची और महाराज आम से मन की बात बताई।

महाराजा आम ने उनसे कहा कि सदियां बीत गई, कभी भी हमारे पूर्वजों ने उस तरफ जाने की कोशिश नहीं की। हम अलग हैं और वो सब्जि़यां अलग, हम आपको वहां जाने की इजाज़त नहीं दे सकते। रानी चेरी नहीं मानी, रूठ कर बैठ गईं।
हारकर राजा आम ने उन्हें बुलाया और कहा कि अगर आप वहां जाना चाहती हैं तो जाएं, लेकिन हम कभी उस तरफ नहीं गए हैं और ना ही जानते हैं कि वहां के निवासी कैसे हैं। अगर आपको आते देख उन्होंने आप पर हमला कर दिया तो...

 इस पर रानी चेरी बोली कि हम वहां दोस्ती का पैगाम लेकर जाएंगे। उनको भी यहां आने के लिए आमंत्रित करेंगे और फलों और सब्जियों के बीच की यह दूरी हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।

राजा आम को यह विचार पसंद आया, लेकिन फिर भी उन्होंने एहतियात बरतने को कहा। रानी से कहा कि हम आपको पूरी तैयारी के साथ वहां भेजेंगे, ताकि अगर वो आपसे मित्रवत् व्यवहार ना करें तो आप उन्हें जवाब दे सकें।

तैयारियां शुरू हुईं।

रानी के लिए अन्नानास का शानदार जहाज बनाया गया, जिसके चारों तरफ हरे कांटों का रक्षाकवच था। रानी को टमाटर नदी सुरक्षित पार कराकर वेजीटेबल किंगडम पहुंचाने की जिम्मेदारी सेनापति अमरूद को दी गईं।
सेनापति अमरूद ने अन्य सब्जियों के लिए खीरे की नावें बनवाईं। सबसे पहले इन नावों में नारियल सेना को उतारा गया। नारियल सेना के पीछे संतरों की सेना चली। इसके बाद बीच में रानी का अन्नानास जहाज और दोनों तरफ अखरोट और खुबानियों भरी नावें चली।

नारियल सेना सब्जि़यों की तरफ से किसी भी तरह के आक्रमण को झेलने में सक्षम थी। संतरे की सेना का हथियार था खट्टा रस और उसके बाद आ रहे आड़ू, खुबानी और अखरोट बम के गोलों की तरह दुश्मनों को मार गिराने में सक्षम थे।

 रानी का काफिला नदी पार करने चला। जैसे ही वेजीटेबल किंगडम की मिर्ची और नींबू सेना को गुप्तचर प्याज ने इसकी खबर दी कि दूसरी तरफ से दलबल के साथ महारानी चेरी इधर आ रही हैं, उन्होंने बैंगन राजा तक बात पहुंचाई। तुरंत बैंगन राजा ने आपात बैठक बुलाई। सारी सब्जियां चिंतिंत थी। जो आज तक नहीं हुआ, होने जा रहा था। फल राज्य से कोई उनके सब्जी राज्य आ रहा था। तब महारानी शिमला मिर्च ने सलाह दी कि महाराज चिंतित मत होईए। अपनी मिर्ची और नींबू सेना को तैयार रखिए। भुट्टे मिसाइल भी मंगवा लीजिए, लेकिन तुरंत हमला मत करिएगा। पहले उन्हें यहां आने दीजिए। क्या पता वो लड़ने के लिए नहीं बल्कि दोस्ती का पैगाम लेकर आईं हों।


बैंगन राजा को महारानी कैप्सिकम की बात जंच गई। तुरंत अपने सेनापति टिंडे को नदी किनारे भेजा। चेरी रानी का काफिला वहां पहुंच चुका था। सेनापति अमरूद आगे आए और उन्होंने वेजीटेबल किंगडम के सेनापति टिंडे से मुलाकात की। उन्हें बताया कि महारानी चेरी सब्जियों के राज्य में घूमना चाहती हैं।

सेनापति टिंडा यह पैगाम लेकर बैंगन राजा के पास गए।

बैंगन राजा ने रानी चेरी और उनके सारे लाव लश्कर को पहले दिन जिमीकंद के गैस्ट हाउस में रुकाया, जहां मटर के सीक्रेट कैमरे लगे थे।
एक दिन तक रानी चेरी और उनके सभी साथियों की सारी गतिविधियां देखने के बाद बैंगन राजा को यकीन हो गया कि महारानी चैरी वाकई दोस्ती का पैगाम लेकर आई हैं। उन्होंने तुरंत महारानी को कद्दू महल बुलाया और उनकी शानदार आवभगत की गई। महारानी कैप्सिकम भी महारानी चेरी से मिलकर बहुत खुश हुईं।

एक हफ्ते तक महारानी चेरी वहां रहीं और विदाई के समय उन्होंने महारानी केप्सिकम और महाराजा बैंगन को खूब सारे अखरोट, काजू, बादाम और अन्य फल उपहारस्वरूप दिए। बैंगन राजा ने भी महारानी चेरी को मटर, सेम, भिंडी आदि देकर विदा किया। चेरी महारानी ने उन्हें अपने फ्रूट किंगडम आने के न्यौता भी दिया।

खुशी-खुशी रानी विदा होकर वापस फ्रूट किंगडम पहुंची और राजा आम से सारी बात बताई। उस दिन से फलों और सब्जियों में दोस्ती हो गई। टमाटर की नदी पर अरबी का पुल बना दिया गया और दोनों राज्य के निवासी एक दूसरे से मिलने जुलने लगे, दोनों के बीच दोस्ती की गांठ जुड़ चुकी थी।


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दो कारों और एक बाइक की दोस्ती की दास्तान..