Tuesday, 16 September 2014

दशकों से कब्रों में सो रहे इन मुर्दों को इनकी कब्रों से निकाल कर सामूहिक कब्र में फेंका गया, केवल इसलिए कि कब्र का मोटा किराया भरने के लिए इनके रिश्तेदारों के पास पैसे नहीं थे...



यह कोई मल्टीफ्लोर सोसाइटी से झांकती बालकनियां नहीं बल्कि ग्वाटेमाला शहर का जनरल कब्रिस्तान है जहां एक के ऊपर एक कई मंजिलनुमा अंदाज में कब्रे हैं। यह कब्रें एक के ऊपर एक बने छोटे-छोटे तलघरों या तहखानों मे हैं जिन्हें अंग्रेजी में क्रिप्ट कहते हैं। इस तस्वीर में कब्रिस्तान के ऊपर जो गिद्ध मंडराता हुआ दिख रहा है, उसकी वजह है, खाने की तलाश... अगर आप यह सोच रहे हैें कि कब्रिस्तान में पत्थरों के अंदर बंद कब्रों से गिद्ध को खाना कैसे मुहैया हो सकता है, तो हम आपको बता दें, कि बिल्कुल हो सकता है। बल्कि ग्वाटेमाला के जनरल कब्रिस्तान में तो अक्सर गिद्ध मंडराते रहते हैं क्योंकि उन्हें यहां अक्सर खाना मुहैया होता रहता है।



जिस तरह सोसाइटी के घरों में रहने वाले लोगों को मकानों का किराया भरना पड़ता है ठीक उसी तरह मरने के बाद इन सोसाइटीनुमा तंग कब्रों में रहने के लिए भी मृत लोगों के रिश्तेदारों को यह कब्रें लीज़ पर लेनी पड़ती हैं और साल दर साल उनका मोटा किराया चुकाना होता है। कई बार तो लोग मरने से पहले अपनी कब्रों के लिए पैसों का इंतज़ाम करके रख कर जाते हैं।
और जैसे ही किसी कब्र की लीज़ खत्म होती है या किराया आना बंद होता है, ग्वाटेमाला के जनरल कब्रिस्तान में कार्यरत ग्रेव क्लीनर्स अपने हथौड़े लेकर संबंधित कब्र पर पहुंच जाते हैं। कब्र तोड़ कर उसमें से ताबूत निकाल लिया जाता है और वो जगह किसी नए पैसे वाले ग्राहक के लिए खाली कर दी जाती है।
उपरोक्त तस्वीर में ऐसा ही हो रहा है। लीज खत्म होने के बाद, ग्रेव क्लीनर एक कब्र को तोड़कर उसके पुराने रहवासी को निकालकर नए के लिए जगह बना रहा है।



और देशों का हाल क्या है यह तो मालूम नहीं, लेकिन डेली मेल और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम ग्वाटेमाला में तो आपको निजी कब्र तभी हासिल होती है जबकि पास आपके रिश्तेदारों के पास कब्र का किराया भरने के लिए पैसे हों। अगर आपके पास पैसे नहीं तो मरने के बाद भी आपको निजता हासिल नहीं होगी बल्कि आपकी मंजिल होगी सामूहिक कब्र।
इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि किस तरह लीज़ खत्म होने के बाद एक अन्य कब्र को तोड़ा जा रहा है।



ग्रेव क्लीनर्स कब्र को खोदकर उसमें से सड़े-गले शव, हड्डियां और बाकी सारा सामान निकाल देते हैं। यहां एक नवजात बच्चे की कब्र को खोदकर उसमें से सफेद ताबूत निकाला गया है।



एक अन्य ग्रेव क्लीनर एक ज़मीदोंज कब्र को खाली कर रहा है। जगह कम होने के कारण कई बार पहले भी खाली होने वाली कब्र के लिए बुकिंग कर ली जाती है।



कब्र से निकले ताबूतों में से विघटित हो चुकी लाश निकाल कर अलग कर ली जाती है और फिर उसे अलग प्लास्टिक के बैग में भर लिया जाता है। नीचे की कब्रों में दफनाई गई लाशें तो कई बार पूरी तरह अपघटित हो जाती हैं लेकिन ऊपर की मंजिलों में दफनाई गई लाशें धूप और नमी नहीं मिलने के कारण ममी में बदल जाती हैं। उनका विघटन नहीं होता, जैसे कि यह खोपड़ी जिसपर कि बाल भी दिख रहे हैं।



निकाले गए सड़े गले शवों को प्लास्टिक के थैलों में भरकर उस पर संबंधित जानकारी लिख दी जाती है जैसे कि मृत व्यक्ति का नाम, मौत का वर्ष, लिंग और जिस कब्र में वो दफनाया गया था उसका कोड आदि। यह सब जानकारी भी केवल इसलिए रखी जाती है ताकि अगर बाद में कोई रिश्तेदार मृत शरीर को दाह संस्कार या किसी और वजह से मांगना चाहे तो पैसे लेकर उसे वो दिया जा सके।



यहां एक ग्रेव क्लीनर एक ममी में बदल चुकी लाश को प्लास्टिक की थैली में भर रहा है। इन ग्रेव क्लीनर्स को कब्र साफ करने के लिए मास्क, दस्ताने और हथोड़े दिए जाते हैं लेेकिन कई बार ये इस काम के इतने अभ्यस्त हो चुके होते हैं कि इन्हें ना तो घिन आती है और ना ही कोई दुर्गंध महसूस होती है और बिना मास्क और दस्तानों के ही मशीनी अंदाज में इन लाशों को निकालने और प्लास्टिक थैलों में भरने का काम करते हैं।



निकाली गई लाशों को पॉलीथीन बैग्स में भरकर बिल्कुल कूड़े के ढेरों की तरह एक के ऊपर एक ट्रक में फेंक दिया जाता है, जहां से यह ट्रक इन्हें सामूहिक कब्र में दफन करने के लिए ले जाते हैं। लाशों को कब्रों और ताबूतों से निकालने की प्रक्रिया में कई बार लाशें टूट जाती हैं, बिखर जाती हैं और जगह जगह मांस, खाल हड्डियां आदि बिखर जाते हैं जिसके चलते यहां मंडराते गिद्धों को खाना मिल जाता है।



कई बार ज़मीन पर बिखरी लाशों को यह ट्रक बिना किसी सम्मान के किसी कूड़े की तरह ही इस तरह उठाकर ले जाते हैं।



यहां ग्रेव क्लीनर्स बिल्कुल इस तरह काम करते हैं जैसे कि वो कब्रों के साथ नहीं बल्कि किसी निर्माण स्थल या रीसाइक्लिंग साइट पर काम कर रहे हों। यहां ट्रक के इंतज़ार में थैलियों में भरी हुई लाशें देखी जा सकती हैं।



यहां ग्वाटेमाला ग्रेवयार्ड के पास लाशें पड़ी हैं और ऊपर खड़े हैं ग्रेव क्लीनर्स। इन ग्रेव क्लीनर्स को यहां सभी उपनामों से जानते हैं जैसे कोको,चकी, लोको, विको और नीग्रो।



कब्रों को खोद कर निकालने, उन्हें पैक करने और सामूहिक कब्र तक ले जाने के काम में इन्हें प्रति कब्र के हिसाब से काफी कम मजदूरी मिलती है। यह काम इन्हें अच्छा नहीं लगता लेकिन फिर भी करते हैं क्योंकि पैसे कमाने का यहीं एक ज़रिया इनके पास है। वैसे एक बात और भी है, नीग्रो के अनुसार अब उन्हें यहां काम करते हुए डर नहीं लगता क्योंकि उन्हें मालूम है कि मृत आत्माएंं उनकी रक्षा करेंगी।



इस तस्वीर में ग्रेव क्लीनर थैलियों में भरी लाशों को सामूहिक कब्र में डालने ले जा रहा है जहां इन शवों को इन्हीं के जैसे हज़ारों अजनबी लाशों के बीच डाल दिया जाएगा।



तीस मीटर गहरी सामूहिक कब्र को ताला लगाकर रखा जाता है क्योंकि कई बार तांत्रिक वगैरह जादू-टोने के लिए यहां से हड्डियां निकाल कर ले जाते हैं। हर लाश एक अलग लेबल्ड पॉलिथीन में होती है ताकि बाद में अगर रिश्तेदार संबंधित लाश लेना चाहे तो उसे ढूंढ कर निकाला जा सके।



शवों को हटाने के बाद बचे टूटे-फूटे ताबुतों को कब्रिस्तान के पास ही कूड़े और टूटी फूटी लकड़ियों के ढेर पर डाल दिया जाता है। वो सभी बची हुई चीज़े जो कि रिश्तेदारों को चाहिए उन्हें एक छोटे डिब्बे में भर कर कब्रिस्तान के एक कमरे में जमा करवा दिया जाता है।

ग्वाटेमाला की यह रिपोर्ट जितनी चौंकाने वाली है उससे भी ज्यादा दुखद और इस कड़वी सच्चाई का अहसास कराने वाली है कि अगर आपके पास पैसे नहीं हैं तो मरने के बाद भी आपकी निजता का हनन होना तय है। मरने के बाद आपके मृत शरीर को भी एक वस्तु की तरह ही प्रयोग किया जाएगा। हो सकता है मरने के बाद भी आपको चैन ना नसीब हो बल्कि आपका अंजाम हज़ारो अनजान मुर्दों के नीचे दबी एक प्लास्टिक की थैली में भरी टूटी-फूटी लाश के रूप में हो...


सभी फोटो-रॉयटर्स
स्त्रोत-
http://www.dailymail.co.uk/news/article-2756622/Mummified-corpses-plastic-bags-filled-decomposed-remains-Guatemalan-grave-cleaners-remove-dead-no-longer-afford-crypts.html

http://widerimage.reuters.com/story/reburying-the-dead