Friday, 20 December 2013

भिखारी भी हैं ट्रेडिंग के धंधे में... भीख के पैसों से होती है ऊपरी कमाई


यह तस्वीर दिल्ली के प्रगति मैदान के पास स्थित दिल्ली के प्रसिद्ध भैंरो मन्दिर से ली गई है। इसे ज़रा गौर से देखिए क्या हो रहा है इसमें। यह काली जैकेट वाला आदमी यहां की पार्किंग का ठेकेदार है और मन्दिर के द्वार पर बैठी यह महिलाए उसके साथ खुले पैसों की ट्रेडिंग कर रही हैं....


दरअसल भिखारियों के पास खुले पैसे या सिक्कों की भरमार होती है। जो भी इन्हें दान में कुछ देता है वो सिक्के या एक, दो या पांच रुपए के नोट होते हैं जिनकी और लोगों को काफी ज़रूरत होती है।


 इसलिए ये लोग भिखारियों को एक या दो रुपए ज्यादा देकर उनसे खुले सिक्के ले लेते हैं। मसलन दस रुपए का नोट देकर एक-एक रुपए के नौ सिक्के लिए जा सकते हैं या फिर बीस-बीस के नोट देकर खुले अट्ठारह या उन्नीस रुपए लिए जा सकते हैं। है तो यह छोटी सी ही ट्रेडिंग, लेकिन इससे इन भिखारियों को थोड़ा फायदा मिल जाता है।   


यह शहजाद है जो भैंरो मन्दिर के बाहर ही भीख मांगते हैं। इन्होंने बताया कि मन्दिर के बाहर बैठने के कारण यहां उन्हें शाम तक सौ-सवा सौ रुपए की खेरीज मिल जाती है और अगर खुले पैसों की किसी को ज़रूरत होती है तो वो दस रुपए ऊपर में उसे यह खुले पैसे बेच देते हैं। और इस तरह उनका 10 रुपए का नफा हो जाता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि और पैसे तो भीख के होते हैं लेकिन खुले पैसों की ट्रेडिंग के बाद मिलने वाले पैसे मेहनत की कमाई है। 


यह केवल दिल्ली की ही दास्तान नहीं है बल्कि शहर के अन्य राज्यों में भी भिखारी महिलाएं व पुरुष भीख में मिलने वाले सिक्कों को ज़रूरतमंदों को कुछ ज़्यादा रुपयों में बेच देते हैं। कई जगह तो यह लोग बाकायदा किसी चबूतरे, पत्थर की बेंच या पेड़ की छांव तले अपनी सिक्कों की दुकान सजा कर सिक्के बेचते देखे जा सकते हैं। 


शहजाद के अनुसार इनसे लोग चढ़ावे के लिए, फुटकर सामान खरीदने के लिए या फिर भिखारियों को ही देने के लिए खुले रुपए ले जाते हैं। इस ट्रेडिंग से खुले पैसे लेने वाले और देने वाले दोनों को ही फायदा होता है। ज़रूरतमंद इंसान को छोटे नोट या सिक्के मिल जाते हैं और भिखारियों को बड़ा नोट मिल जाने के कारण भारी रेजगारी या खुले रुपयों का हिसाब रखने के झंझट से छुटकारा मिल जाता है।