Monday, 5 August 2013

विदेश जाने वाले भारतीय रक्षा के लिए साथ ले जाते हैं स्वास्तिक चिन्ह, भगवान की मूर्ति, श्रीयंत्र...



विदेशों में युवाओं की रक्षा करते हैं, गणेश जी की मूर्ति, देवी मां का चित्र, रुद्राक्ष माला, वैष्णो मां की लाल चुनरी, कान्हा जी की तस्वीर या पीतल के ठाकुर जी... जी हां, बहुत से भारतीय माता-पिता अपने युवा बच्चों को विदेश भेजते समय इन चीजों  को उनके साथ इस भरोसे से भेजते हैं कि यह विदेश में ना केवल उनके लाड़लों की रक्षा करेंगी, बल्कि उन्हें सफलता भी दिलाएंगी और शायद भारत की संस्कृति से भी जोड़े रखेंगी।

  लैपटॉप या डायरी पर स्वास्तिक का चिन्ह और पर्स में महामृत्युंजय मंत्र लिखा हुआ कागज़ या पैरों में काला डोरा.... यह सब ऐसे टोटके या कहें धार्मिक विश्वास हैं जिनके साथ अभिभावक युवा बच्चों के साथ अपना विश्वास भेजते हैं कि अगर हम तेरे साथ नहीं हैं तो यहीं चीज़े तेरे साथ रहेंगी और तेरी रक्षा करेंगी।

     भारत देश के मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर रहे युवाओं को जब भी कंपनी के काम से विदेशों जैसे अमेरिका, लंदन, मलेशिया, दुबई या किसी और देश में में जाने का मौका मिलता है तो वो लोग भले ही कितने भी खुश हो लें, लेकिन मम्मी-पापाओं और करीबी रिश्तेदारों के लिए अपने बच्चों को इतनी दूर भेजने का फैसला करना आसान नहीं  होता।  सात समुंदर पार विदेश में कौन मेरे बच्चे की देखभाल करेगा, कौन उसका ख़याल रखेगा, कौन उसके दुख दर्द बांटेगा, कहीं वो बीमार पड़ गया तो... जैसे बहुत से डर हैं, जो माता-पिता को परेशान करते रहते हैं और इसलिए बहुत से हिन्दुस्तानी लोग अपने बच्चो को अकेले बाहर भेजते समय अपने विश्वास के रूप में भगवान की मूर्तियां, तस्वीरें, रुद्राक्ष, माला, माता की लाल चुनरी... जैसी कोई ना कोई चीज़ उनके सामान में रखकर उनके  साथ भेज देते हैं, जो उनके ना होने की स्थिति में विदेश में उनके बच्चों की रक्षा करेंगी।
इसके अलावा लैपटॉप, टैबलेट या फोन जैसी चीज़ो पर रोली से  स्वास्तिक बनाना और बच्चों के जाने से पहले घर में सत्यनारायण की पूजा रखना, छप्पन भोग लगवाना, प्रसाद बंटवाना जैसे बहुत से काम हैं जो मां बाप अपने विदेश जाने वाले बच्चों के जाने से पहले करवाना पसंद करते हैं।

 आई टी कंपनी जेनपेक्ट में काम करने वाले सॉफ्टवेयर कंसलटेन्ट रजनीश अग्रवाल को एक प्रोजेक्ट के लिए जब छह महीने के लिए अमेरिका जाने का मौका मिला तो उसकी पत्नी ने रजनीश के साथ गणेश जी की मूर्ति रखी और साथ ही लैपटॉप पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह भी बनाया जिससे रजनीश को अपने काम में सफलता मिले। उसी की कंपनी से जब उसका एक सहयोगी राहुल कुछ समय पहले अमेरिका गया था तो उनके मम्मी पापा ने उसके कपड़ो के साथ माता की लाल चुन्नी रखी थी। टीसीएस की आस्था जब तीन महीने के लिए जर्मनी गई तो पहले तो मां ने घर पर सत्यनारायण की पूजा करवाई और फिर उसके पैर में काला धागा बांध कर उसे जर्मनी भेजा कि कहीं उसे या उसकी सफलता को किसी की नज़र ना लगे। विप्रो, गुड़गांव में काम करने वाले अंशुल अग्रवाल को भी जब सऊदी अरब जाने का मौका मिला तो उनकी मां ने उसकी अटैची में श्रीयंत्र रखा ताकि उसका हर काम शुभ हो। औरो को शायद अजीब लगने वाली यह चीजें भारत के लोगों के विश्वास की प्रतीक हैं जिन्हें अपने बच्चो के साथ भेजकर दरअसल मां-बाप उनके लिए भगवान का साथ भेजते हैं।

देसी चूर्ण, मसाले और नमकीन खूब मंगाया और भेजा जाता है विदेश में बसे भारतीयों को
जी हां, विदेश में बाकी सारी सुविधाएं भले ही मिले लेकिन कुछ चीज़े ऐसी हैं, जो भारत में ही मिलती हैं और जिनका स्वाद, ज़रूरत या आदत विदेश में बसे भारतीयो को नहीं भूलाए नहीं भूलती। इसलिए जब भी वो यहां आते हैं या यहां से कोई परिचित वहां जाता है तो नित्यम चूर्ण, आनंदम चूर्ण, कोई और चूर्ण, मसाले या चटपटी नमकीन विदेश में बसे भारतीय अपने लिए ले जाते हैं या मंगवाते हैं।